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Silence

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This month I wrote a poem in Hindi called Sannata, this is something similar but for my friends who are not so well versed in Hindi.

Does it happen to you too??

Loss of words and peace too

 

There is so much in me

But words let me down

My emotions want out

In pain, I want to shout

Does it happen to you too??

Loss of words and peace too

 

have so much to share

But still somehow I am empty

There is a void in me

Filled with dark clouds aplenty

Does it happen to you too??

Loss of words and peace too

 

My life is full

But my paper is white

Running after a mirage

My thirst is still alive

Does it happen to you too??

Loss of words and peace too

 

The silence of my pen

Stifles me, makes me sad

How can I reach your heart?

Do let me know, my friend

Does it happen to you too??

Loss of words and peace too

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सन्नाटा

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उठता हैं बवंडर शब्दों का

पर चुप हैं कलम

और खामोश है जुबान

सन्नाटा सा छाया हैं

जब सदियाँ हैं करने को ब्यान

 

ढूँढ रही हूँ, भटक रही हूँ

चलता हैं एक अंतर्द्वंद

कहने को, है इतना कुछ

पर छाई हैं, एक  गहरी धुंध

 

उतावले बैठे हैं इतने क्षण

कुछ शब्दों मैं गढ़ जाने को,

एक मूरत सी बनती हैं

कुछ पन्नों मैं छप जाने को

 

ऐसा नहीं की,

मन का कोष हैं खाली

हैं बहुत से सपने, ढेर सी हकीकत

इतनी खुशियाँ  जो मैंने पाली

 

अंतर्मन मैं, उठती हैं लहरें

बाँट सकूँ सब संग,

हर पल जो मैंने पाया

हर अश्रु जो पलकों पर आया

 

बनते बिगड़ते रिश्तों की

दिन रात  उलझते धागों की

मौन पलों और  कहते अधरों की

दास्ताँ हैं बयाँ करनी मुझे

मौसम के आते जाते  हर रंगों की

 

माना एक प्रश्नचिन्ह है मेरे आगे

पर क्या यह होता हैं सबके संग

क्या हैं कोई एक भी मेरे जैसा

जो चाह कर भी न बाँट सके

अपने अंदर का कोई रंग

 

आज  चुप हैं कलम

और खामोश है जुबान

सन्नाटा सा छाया हैं

जब सदियाँ हैं करने को ब्यान